Tuesday, May 30, 2006

बचपना

हम बच्चों को
बताते हैं-
अपने-पराए का भेद
नफे-नुकसान का गणित,
गिनाते हैं-
चाकलेट की खामियां
रटाते हैं 'पॉयम'
सलीका मेहमानों से बोलने का
गुर दुनियादारी के,

उनका बचपना छीनने का

कितना बचपना करते हैं हम।

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2 आपकी राय:

DEEPASTI ने कहा…

I LIKE THE MOST SUCH A REAL THING EVER I HAD READ, REALY I LIKE IT LIKE ANYTHING. THANKS

Suresh Chandra Gupta ने कहा…

पर नहीं सिखाते उन्हें प्रेम करना,
सचमुच बचपना ही तो हे यह.