Tuesday, May 30, 2006

सूरज

सूरज के आने की
धमक होती नहीं
ढोल-नागाडो से
ना कोई घोषणा
ना कोई एलान
तिमिर की छाती भेदकर
बस आ जाता है वह
गुपचुप
पसर जाता है
हर तरफ़।
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