|| अनहद नाद ||
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Tuesday, May 30, 2006
समरसता
जंगल जाग रहे हैं
इससे पहले कि
छाती में
दावानल लिए
वे शहर का रुख करें
शोषण से सने हाथों को
पोंछ लेना
समरसता के संकल्प से
तरजीह देना
इन्सान की तरह।
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