खस्ताहाल सड़क ओबरी की
लाती है
एक टूटी बस हर रोज
करती है तृप्त
लाती है
एक टूटी बस हर रोज
करती है तृप्त
ठेकेदार की लालच
सजाती है
अफसरों के मस्टर
हर पांचवे बरस
वह हो जाती है मुद्दा
चुनाव जीतने का
किसी द्वीप से बचे
इसके काले-धूसर डामर पर
लिखते हैं बच्चे खडिया से
तो छप्पक-छई बन जाते हैं
इसके गड्डे बारिश में
बड़े काम की है
सड़क ओबरी की
सिवा एक सड़क के रूप में !
..................................................
# 'युगनाद' २००६, उदयपुर में एवं www.aakhar.org में प्रकाशित
सजाती है
अफसरों के मस्टर
हर पांचवे बरस
वह हो जाती है मुद्दा
चुनाव जीतने का
किसी द्वीप से बचे
इसके काले-धूसर डामर पर
लिखते हैं बच्चे खडिया से
तो छप्पक-छई बन जाते हैं
इसके गड्डे बारिश में
बड़े काम की है
सड़क ओबरी की
सिवा एक सड़क के रूप में !
..................................................
# 'युगनाद' २००६, उदयपुर में एवं www.aakhar.org में प्रकाशित
*ओबरी -लेखक का गांव
2 आपकी राय:
KAVI NE JIS SADAK KA JIKRA KIYA HAI, YEH WAHI SADAK HAI JAHA SE HUM GAMARA SE OBRI AAYA KARTE THE CRICKET KA BAT LE KAR.........
AAJ UN HASIN DINO KI YAAD DILADI. AAJ UN TUTI SADKO SE HOKAR HUM BOMBAY KE FLYOVER PER AA TO GAYE HAI PAR AAJ BHI MAN CHAHTA HAI KI KABHI KAHI IS SAFAR ME WOHI SADAK PHIR MILE TO KUCH RUK KAR SUKUN PA LENGE.........
jo bat hamare jehan me thi
wo to aapne likha dali
per himmat na haar
aa gaya hai taranhar
vo sabkuch hoga
phir koshish hogi
dekhna
ek din sadak hi nahi
DUNIYA hamari hogi
sab ne kiya naraj
hum nahi karege
aapki fariyad puri
karenge
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